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सुप्रीम कोर्ट में वकील ने सीजेआई गवई पर फेंका जूता, सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत पकड़ा, जानिए पूरा मामला

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Posted On:Monday, October 6, 2025

मुंबई, 06 अक्टूबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस वक्त हंगामा मच गया जब एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई पर हमला करने की कोशिश की। यह घटना उस समय हुई जब सीजेआई की बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी। कोर्टरूम में मौजूद वकीलों के मुताबिक, आरोपी वकील ने अचानक सीजेआई की ओर जूता फेंका, लेकिन वह बेंच तक नहीं पहुंच पाया। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत वकील को पकड़ लिया। बाहर ले जाते समय उसने नारा लगाया— “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।”

घटना के बाद अदालत में मौजूद सभी लोग कुछ क्षण के लिए स्तब्ध रह गए, लेकिन सीजेआई ने शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है, मैं भी विचलित नहीं हूं और ऐसी बातों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। इसके बाद सुनवाई सामान्य रूप से जारी रही। इस घटना के तुरंत बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने आरोपी वकील राकेश किशोर कुमार का लाइसेंस रद्द कर दिया। उसका रजिस्ट्रेशन वर्ष 2011 का बताया गया है। साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी उसे निलंबित कर दिया। बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि यह पेशेवर आचरण के नियमों का गंभीर उल्लंघन है। निलंबन अवधि के दौरान आरोपी किसी भी अदालत में प्रैक्टिस नहीं कर सकेगा और 15 दिनों के भीतर उसे शो कॉज नोटिस जारी किया जाएगा।

एससीबीए ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह का असंयमित व्यवहार पूरी तरह अनुचित है और यह न्यायपालिका तथा वकील समुदाय के बीच पारस्परिक सम्मान की नींव को कमजोर करता है। संस्था ने कहा कि ऐसे कार्य न्याय के ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचाते हैं, जो देश के लोकतंत्र की बुनियाद है। इस घटना पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के भीतर भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश पर हुआ हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान और कानून के शासन पर सीधा प्रहार है। सोनिया गांधी ने कहा कि CJI गवई ने इस कठिन स्थिति में संयम और गरिमा का उदाहरण प्रस्तुत किया है, और देश को उनके साथ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। माना जा रहा है कि आरोपी वकील सीजेआई गवई की उस टिप्पणी से नाराज था, जो उन्होंने 16 सितंबर को खजुराहो में भगवान विष्णु की सिर कटी मूर्ति की पुनर्स्थापना से जुड़ी याचिका पर की थी। उस दौरान उन्होंने कहा था— “जाओ और भगवान से खुद करने को कहो। तुम कहते हो भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हो, तो उनसे प्रार्थना करो।” इसी टिप्पणी के बाद वकील ने यह कदम उठाया बताया जा रहा है।


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