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दत्तात्रेय होसबाले ने नोएडा में कहा, देश को इंडिया नहीं, भारत कहो, जानिए पूरा मामला

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Posted On:Tuesday, March 11, 2025

मुंबई, 11 मार्च, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा- अपने देश को इंडिया नहीं, भारत कहना चाहिए। इसे ठीक करना पड़ेगा। देश को दो नामों से क्यों जाना जा रहा है? इसे ठीक करना ही पड़ेगा। भारत है, तो भारत ही कहो। दत्तात्रेय होसबाले नोएडा में विमर्श भारत का पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा- क्या भारत एक जमीन का टुकड़ा है? या संविधान से चलने वाला केवल एक भारत? केवल ऐसा नहीं है, भारत एक जीवन दर्शन है, आध्यात्मिक प्रतिभूत है। विश्व को संदेश देने वाला विश्वगुरु है।

दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, पिछले दिनों सरकार ने जी-20 सम्मेलन में राष्ट्रपति आवास पर भोज के लिए निमंत्रण में रिपब्लिक ऑफ भारत लिखा गया। कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया यानी भारत का संविधान, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी भारत का रिजर्व बैंक। इस पर सवाल उठना चाहिए। आज भारत पूरी तरह से स्वतंत्र है, उसका मस्तिष्क स्वतंत्र है। पूरी दुनिया में विमर्श की लड़ाई है। पहले के दशकों में पढ़ाया जाता था कि भारत का गणित और विज्ञान के क्षेत्र में कोई योगदान नहीं। भारत के इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा गया है, जबकि इसका इतिहास समृद्धि से भरा पड़ा है। भारत के बारे में बहुत भ्रामक बातें फैलाई गईं। कहा गया कि भारत केवल एक कृषि प्रधान देश है। यहां किसी भी प्रकार का उद्योग नहीं है, जबकि यह सत्य नहीं है। हम किसी भी क्षेत्र में कम नहीं थे। हमने अपने स्वाभिमान को खोया। हमारी शिक्षा पद्धतियां नष्ट हुईं। जो बाहरी आक्रांता आए, उन्होंने हमारे देश का दमन किया।

उन्होंने आगे कहा, महाकुंभ विमर्श ने एक महासमर खोल दिया है। महाकुंभ से निकले हुए ऐसे कई विमर्श अलग-अलग दिशा में लोगों का मार्गदर्शन करेंगे। भारत में हजारों पंथ हैं। भारत में हमारे जो पूर्वज थे, उन्होंने निश्चय कर लिया था कि किसी भी स्थिति में अपनी संस्कृति की रक्षा करना है। अपने विचार को बचा कर रखना है। काल के प्रवाह में भी इस देश की कभी संस्कृति नष्ट नहीं हुई। हमारे देश के मनीषियों ने इसको अलग-अलग रूप में पेश किया है। हमारा दायित्व बनता है कि हम पूरे भारत में शांति स्थापित करें। पूरे भारत में तरह-तरह के विमर्श नरेटिव के रूप में चलाए जाते हैं। हमें सत्य लिखना है, सत्य बोलना है। सत्य ही दिखाना है। यह बौद्धिक संघर्ष की बात है। जब बौद्धिक संघर्ष की बात आती है तो हमारा ध्येय सत्य की स्थापना, खोज और जीना होना चाहिए।


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